कनाडा में 10 लाख से अधिक भारतीयों पर संकट: लीगल स्टेटस खोने का डर, जानें क्या है नया नियम

कनाडा में 10 लाख से अधिक भारतीयों पर संकट: लीगल स्टेटस खोने का डर, जानें क्या है नया नियम

कनाडा में रह रहे भारतीय समुदाय के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, कनाडा की आव्रजन नीतियों में हो रहे कड़े बदलावों के कारण करीब 10 लाख से अधिक भारतीयों के ‘लीगल स्टेटस’ पर तलवार लटक रही है। इनमें बड़ी संख्या में छात्र, अस्थायी कर्मचारी और वे लोग शामिल हैं जो स्थायी निवास (PR) की प्रतीक्षा कर रहे हैं।

आव्रजन नीतियों में बदलाव का असर

कनाडा सरकार ने हाल के महीनों में अपनी ‘ओपन डोर’ पॉलिसी को बदलते हुए अस्थायी निवासियों की संख्या में कटौती करने का निर्णय लिया है। आवास संकट और बढ़ती बेरोजगारी से निपटने के लिए जस्टिन ट्रूडो सरकार ने वर्क परमिट और स्टूडेंट वीजा के नियमों को सख्त कर दिया है। इसका सीधा असर उन भारतीयों पर पड़ रहा है जिनका वीजा जल्द ही समाप्त होने वाला है और जिन्हें रिन्यूअल मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है।

छात्रों और कामगारों की बढ़ी मुश्किलें

कनाडा में भारतीय छात्र सबसे बड़ा विदेशी समूह हैं। नए नियमों के तहत, पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) हासिल करना अब पहले जैसा आसान नहीं रहा। कई भारतीयों को डर है कि यदि उनका वर्क परमिट विस्तार नहीं मिला, तो उन्हें देश छोड़ना पड़ सकता है या वे अनधिकृत रूप से रहने को मजबूर होंगे। इससे न केवल उनके भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है, बल्कि उनके द्वारा किए गए भारी निवेश पर भी पानी फिरता नजर आ रहा है।

क्या है आगे की राह?

विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा अब ‘चयनित आव्रजन’ (Selective Immigration) की ओर बढ़ रहा है, जहाँ केवल विशिष्ट कौशल वाले लोगों को ही प्राथमिकता दी जाएगी। ऐसे में विशेषज्ञों की सलाह है कि वहां रह रहे भारतीय कानूनी विकल्पों की तलाश करें और आव्रजन नियमों के प्रति अपडेट रहें। इस स्थिति ने उन हजारों परिवारों को भी तनाव में डाल दिया है जिनके बच्चे सुनहरे भविष्य की तलाश में कनाडा गए थे।

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