रायपुर। आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी कमर कस ली है। इसी कड़ी में भाजपा के राष्ट्रीय संगठन ने छत्तीसगढ़ के चार प्रमुख नेताओं और मंत्रियों को असम विधानसभा चुनाव के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। इन नेताओं में डिप्टी सीएम अरुण साव, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू और दुर्ग के सांसद विजय बघेल शामिल हैं।
इन सभी नेताओं को असम के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों के प्रचार और चुनावी प्रबंधन का जिम्मा दिया गया है। सोमवार को ये सभी दिग्गज नेता रायपुर एयरपोर्ट से असम के लिए रवाना हुए।
किसे मिली कौन सी जिम्मेदारी?
संगठन द्वारा तय की गई नई जिम्मेदारियों के अनुसार:
- अरुण साव (डिप्टी सीएम): इन्हें असम की 9 विधानसभा सीटों का प्रभार सौंपा गया है।
- ओपी चौधरी (वित्त मंत्री): इन्हें 10 विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी गई है। वे करीब एक सप्ताह तक असम के प्रवास पर रहेंगे।
- विजय बघेल (सांसद, दुर्ग): इन्हें डिब्रूगढ़ लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली 10 विधानसभाओं की कमान सौंपी गई है।
- तोखन साहू (केंद्रीय राज्य मंत्री): इन्हें भी एक विशिष्ट लोकसभा क्षेत्र में चुनाव प्रचार और संगठन को मजबूती देने का कार्य सौंपा गया है।
“असम में बीजेपी के पक्ष में माहौल” – अरुण साव
असम रवाना होने से पहले रायपुर एयरपोर्ट पर मीडिया से चर्चा करते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ के कार्यकर्ताओं को अक्सर दूसरे राज्यों के चुनावों में जिम्मेदारी दी जाती है, जो हमारे लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा, “असम अब अशांति के दौर से बाहर निकलकर विकास की ओर तेजी से बढ़ रहा है। वहां भाजपा के पक्ष में जबरदस्त सकारात्मक माहौल है। हम स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर पार्टी की जीत सुनिश्चित करेंगे।”
विपक्ष पर साधा निशाना
मीडिया से बातचीत के दौरान अरुण साव ने कांग्रेस पर भी तीखा प्रहार किया। कांग्रेस द्वारा जिला अध्यक्षों की रैंकिंग तय करने के फैसले पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस पूरी तरह से मुद्दाविहीन और दिशाहीन हो चुकी है। साव ने कहा, “कांग्रेस को पहले अपने केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के प्रदर्शन (Performance) पर ध्यान देना चाहिए, उसके बाद जिला अध्यक्षों की रैंकिंग करनी चाहिए।”
अन्य मुद्दों पर भी रखी राय
साव ने बस्तर के विकास और नक्सलवाद के मुद्दे पर बोलते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नक्सलवाद अंतिम चरण में है। बस्तर का नक्सल मुक्त होना वहां के सर्वांगीण विकास के लिए अनिवार्य है। साथ ही, उन्होंने मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन को लोकतंत्र की मजबूती के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
छत्तीसगढ़ के इन दिग्गजों की असम में मौजूदगी इस बात का संकेत है कि भाजपा आगामी चुनावों में किसी भी तरह की कसर नहीं छोड़ना चाहती और अपने अनुभवी नेताओं के चुनावी प्रबंधन कौशल का पूरा लाभ उठाना चाहती है।