रायपुर: छत्तीसगढ़ में मतदाता सूची के विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है। निर्वाचन नामावली के अंतिम प्रकाशन के साथ ही प्रदेश में करीब 24 लाख 99 हजार 823 मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इतनी बड़ी संख्या में नाम काटे जाने को लेकर कांग्रेस और सत्ताधारी भाजपा के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।
कांग्रेस के गंभीर आरोप
कांग्रेस ने मतदाता सूची में हुई इस कटौती पर कड़ी आपत्ति जताई है। कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री मलकीत सिंह गैदु ने भाजपा सरकार और निर्वाचन आयोग पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अधिकारियों के माध्यम से सुनियोजित तरीके से वोट कटवाए हैं।
कांग्रेस का दावा है कि यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया है ताकि विपक्ष को नुकसान पहुँचाया जा सके। गैदु ने यहाँ तक कह दिया कि निर्वाचन आयोग निष्पक्ष रूप से कार्य करने के बजाय ‘भाजपा के एजेंट’ के रूप में काम कर रहा है। कांग्रेस ने इस संबंध में चुनाव आयोग से औपचारिक शिकायत भी दर्ज कराई है।
भाजपा का पलटवार
कांग्रेस के आरोपों पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव ने कड़ा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को देश की संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है। जब भी चुनाव के परिणाम उनके पक्ष में नहीं होते या कोई प्रशासनिक प्रक्रिया होती है, तो वे संस्थाओं पर प्रश्नचिह्न खड़ा करने लगते हैं।
किरण सिंह देव ने सवाल उठाया कि “जब कांग्रेस चुनाव जीतती है या उनके विधायक चुनकर आते हैं, तब उन्हें ईवीएम या संवैधानिक संस्थाओं में कोई दोष नजर नहीं आता। यह लोकतंत्र है और जनता सर्वोपरि है।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस सत्ता में आने की जल्दबाजी में है और जनता के बीच भ्रम का माहौल पैदा करना चाहती है।
क्या है वर्तमान स्थिति?
निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, फर्जी और संदिग्ध मतदाताओं को हटाने के बाद अब छत्तीसगढ़ में कुल मतदाताओं की संख्या 1,87,30,914 रह गई है। आयोग का तर्क है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है जिसके तहत दोहरी प्रविष्टियों और मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं ताकि एक पारदर्शी मतदाता सूची तैयार की जा सके।
फिलहाल, इस मुद्दे ने राज्य के सियासी तापमान को बढ़ा दिया है, जहाँ एक ओर कांग्रेस इसे ‘लोकतंत्र की हत्या’ बता रही है, वहीं भाजपा इसे चुनावी शुद्धिकरण की प्रक्रिया करार दे रही है।