ईरान ने रखी युद्ध खत्म करने की 3 शर्तें; राष्ट्रपति बोले- अंतरराष्ट्रीय गारंटी मिलने पर ही रुकेगी जंग

ईरान का अमेरिका पर पलटवार:

तेहरान: ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने शांति बहाली के लिए अपनी मांगें रखी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान क्षेत्रीय शांति के प्रति प्रतिबद्ध है, लेकिन संघर्ष को समाप्त करने के लिए कुछ ठोस कदम उठाए जाने अनिवार्य हैं। राष्ट्रपति ने यह बयान रूस और पाकिस्तान के नेताओं के साथ हुई चर्चा के दौरान दिया।

शांति के लिए ईरान की तीन शर्तें: राष्ट्रपति पेजेशकियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर जानकारी साझा करते हुए तीन मुख्य मांगें रखी हैं:

  1. वैध अधिकारों की मान्यता: अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विरोधी पक्ष ईरान के कानूनी और संप्रभु अधिकारों को स्वीकार करें।
  2. हर्जाने का भुगतान: युद्ध और हमलों के कारण ईरान को हुए आर्थिक और सैन्य नुकसान की भरपाई (Reparations) की जाए।
  3. अंतरराष्ट्रीय गारंटी: भविष्य में ईरान पर किसी भी तरह के हमले न होने की ठोस अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए।

मौजूदा स्थिति और तनाव के कारण: मिडिल ईस्ट में युद्ध का यह चरण तब और भीषण हो गया जब हाल ही में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई और कई शीर्ष अधिकारियों के हवाई हमलों में मारे जाने की खबरें आईं। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें दागीं।

इस तनाव का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ा है। ईरान द्वारा ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ (दुनिया का प्रमुख तेल आपूर्ति मार्ग) को बंद करने की चेतावनी और वहां जारी सैन्य गतिविधियों के कारण कच्चे तेल और गैस की कीमतों में उछाल आया है।

डिप्लोमैटिक कोशिशें: ईरान के राष्ट्रपति की इन शर्तों को कूटनीतिक हलकों में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। रूस और पाकिस्तान जैसे देश तनाव कम करने के लिए मध्यस्थता की कोशिश कर रहे हैं। पेजेशकियन का कहना है कि यह युद्ध उन पर थोपा गया है और वे भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित होने तक पीछे नहीं हटेंगे।

दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान बिना किसी शर्त के पीछे हट जाएगा, जबकि जमीनी हकीकत इसके विपरीत नजर आ रही है। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि बिना “ठोस गारंटी” के वे हथियारों को शांत नहीं करेंगे। इस संघर्ष में अब तक 1,700 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और हजारों घायल हुए हैं।

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