ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और मध्य पूर्व के युद्ध स्तर के हालातों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ भारतीय सर्राफा बाजार को भी पूरी तरह से हिला कर रख दिया है। आमतौर पर युद्ध की स्थिति में सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार बाजार का रुख काफी अलग और चौंकाने वाला रहा है। पिछले कुछ हफ्तों के रिकॉर्ड स्तर से सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट ने आम खरीदारों और निवेशकों को बड़ी राहत दी है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अपने उच्चतम स्तर से सोने के दाम में करीब 12,000 रुपये और चांदी के दाम में 31,000 रुपये तक की भारी कमी दर्ज की गई है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई बड़े वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। पहला कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती और दूसरा बड़े निवेशकों द्वारा उच्च स्तर पर की गई भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) है। इसके अलावा, अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर लिए गए फैसलों ने भी पीली धातु पर दबाव बनाया है। रायपुर, दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों के बाजारों में इस सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के बाद ग्राहकों की रौनक एक बार फिर लौट आई है, खासकर वे लोग जो शादियों के सीजन के लिए खरीदारी का इंतजार कर रहे थे।
यदि हम विस्तार से देखें, तो कुछ समय पहले सोना 80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के पार चला गया था, जो अब लुढ़ककर काफी नीचे आ गया है। इसी तरह, चांदी जो 1 लाख रुपये के स्तर को छूने वाली थी, उसमें 31,000 रुपये की कमी आने से वह अब आम आदमी की पहुंच में नजर आ रही है। हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है कि सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का यह दौर स्थाई नहीं हो सकता है। जैसे-जैसे वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां बदलेंगी, कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है। इसलिए, जो लोग लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए वर्तमान बाजार भाव एक सुनहरा अवसर साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, ईरान युद्ध के साये में भारतीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट ने एक नया समीकरण पैदा कर दिया है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार के उतार-चढ़ाव पर पैनी नजर रखें और हर गिरावट पर थोड़ा-थोड़ा निवेश करने की रणनीति अपनाएं। फिलहाल, 12,000 रुपये तक सस्ता सोना और 31,000 रुपये सस्ती चांदी भारतीय मिडिल क्लास के लिए किसी बड़े तोहफे से कम नहीं है। आने वाले दिनों में यदि वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में और अधिक स्थिरता देखने को मिल सकती है।