शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बीच हुए संक्षिप्त हैंडशेक (हाथ मिलाने) को लेकर पाकिस्तान में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जहां पाकिस्तानी मीडिया और सरकार इसे एक ‘बड़ी कूटनीतिक जीत’ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं भारत ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि शिष्टाचार और कूटनीति दो अलग चीजें हैं।
पाकिस्तान का उत्साह और भारत की स्पष्टता
पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में इस मुलाकात को द्विपक्षीय संबंधों में जमी बर्फ पिघलने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। पाकिस्तानी नेताओं ने इसे एक ‘बड़ी उपलब्धि’ करार दिया। हालांकि, भारतीय विदेश मंत्रालय के सूत्रों और विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि बहुपक्षीय मंचों पर वैश्विक नेताओं के बीच हाथ मिलाना एक सामान्य प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का हिस्सा है, इसे किसी औपचारिक वार्ता की शुरुआत नहीं माना जाना चाहिए।
आतंकवाद पर कोई समझौता नहीं
भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को उसकी जगह दिखाते हुए साफ किया कि ‘आतंकवाद और बातचीत’ एक साथ नहीं चल सकते। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन के दौरान अपने संबोधनों में बिना नाम लिए सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा उठाया। भारत का रुख अडिग है कि जब तक पाकिस्तान अपनी जमीन से पनपने वाले आतंकवाद को पूरी तरह खत्म नहीं करता, तब तक संबंधों में सुधार की कोई गुंजाइश नहीं है।
कूटनीतिक हार छिपाने की कोशिश
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते अलगाव के कारण, वहां की सरकार एक साधारण हैंडशेक को भी अपनी सफलता के रूप में भुनाना चाहती है। भारत ने सख्त लहजे में यह संदेश दे दिया है कि पाकिस्तान को “अच्छे पड़ोसी” की जिम्मेदारी निभानी होगी, न कि केवल फोटो खिंचवाकर कूटनीतिक लाभ लेने की कोशिश करनी चाहिए।