जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन ने आतंकवाद के पारिस्थितिकी तंत्र (Terror Ecosystem) को जड़ से खत्म करने के लिए अब तक का सबसे बड़ा अभियान शुरू किया है। इस ऑपरेशन के तहत प्रदेश के 200 से अधिक सरकारी कर्मचारी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की जांच के घेरे में आ गए हैं। संदेह है कि ये कर्मचारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राष्ट्र विरोधी गतिविधियों या आतंकी नेटवर्क की मदद कर रहे थे।
संदिग्धों की कुंडली खंगाल रही एजेंसियां
सूत्रों के मुताबिक, जांच के घेरे में आए ये कर्मचारी विभिन्न विभागों में तैनात हैं। इन पर आरोप है कि इन्होंने अपनी आधिकारिक स्थिति का दुरुपयोग कर आतंकी समूहों को लॉजिस्टिक सहायता, सूचना साझा करने या फंड जुटाने में मदद की है। वर्तमान में पुलिस और खुफिया ब्यूरो (IB) इन सभी की संपत्तियों, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की गहनता से जांच कर रही है।
नौकरी से बर्खास्तगी और जेल की सजा
प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्र की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि जांच में कोई भी कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो उसे तत्काल प्रभाव से ‘सेवा से बर्खास्त’ कर दिया जाएगा। इसके अलावा, उन पर कड़े आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत मुकदमा चलाया जाएगा, जिसमें लंबे समय तक जेल की सजा का प्रावधान है। पिछले कुछ महीनों में पहले ही कई कर्मचारियों को राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के कारण सेवामुक्त किया जा चुका है।
‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति
केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन और केंद्र सरकार की यह कार्रवाई ‘टेरर-फ्री’ जम्मू-कश्मीर के विजन का हिस्सा है। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी तंत्र के भीतर छिपे ‘स्लीपर सेल्स’ या समर्थकों को हटाना शांति बहाली के लिए अनिवार्य है। इस व्यापक धरपकड़ से प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। आने वाले दिनों में कई और बड़ी गिरफ्तारियां और बर्खास्तगी की संभावना जताई जा रही है।