बीजापुर, छत्तीसगढ़। छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले में सुरक्षा बलों को एक बड़ी कामयाबी मिली है। राज्य सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ (आपका अच्छा गांव) योजना और पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर एक डीवीसीएम (डिवीजनल कमेटी मेंबर) सहित कुल 12 सशस्त्र माओवादियों ने पुलिस और प्रशासन के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। मुख्यधारा में लौटने वाले इन नक्सलियों में 8 महिला माओवादी और 4 पुरुष माओवादी शामिल हैं।
54 लाख रुपये का था इनाम आत्मसमर्पण करने वाले इन 12 माओवादियों की गिरफ्तारी पर सरकार ने कुल 54 लाख रुपये का सामूहिक इनाम घोषित कर रखा था। समर्पण के दौरान माओवादियों ने अपने साथ अत्याधुनिक हथियार भी सौंपे, जिनमें एक AK-47 और दो SLR (सेल्फ लोडिंग राइफल) शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, ये सभी नक्सली बीजापुर और बस्तर के विभिन्न क्षेत्रों में आईईडी ब्लास्ट, आगजनी, पुलिस पार्टी पर हमला और हत्या जैसी कई गंभीर घटनाओं में सक्रिय रूप से शामिल रहे थे।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में समर्पण यह आत्मसमर्पण बस्तर आईजी पी. सुंदरराज, सीआरपीएफ डीआईजी देवेंद्र सिंह नेगी और बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव सहित अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ। अधिकारियों ने माओवादियों के इस निर्णय का स्वागत किया और उन्हें शासन की पुनर्वास नीति के तहत तत्काल सहायता के रूप में 50-50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि के चेक प्रदान किए।
विकास कार्यों और पुनर्वास नीति का असर बस्तर आईजी पी. सुंदरराज ने इस अवसर पर कहा कि सरकार की ‘नियद नेल्लानार’ योजना नक्सल प्रभावित अंदरूनी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुँचाने में सफल हो रही है। माओवादी अब हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की मुख्यधारा से जुड़ना चाहते हैं। उन्होंने अन्य माओवादियों से भी अपील की है कि वे हथियार छोड़कर समाज का हिस्सा बनें।
आंकड़ों में बड़ी सफलता पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में भारी सफलता मिली है। इस साल अब तक कुल 888 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 1163 को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, अलग-अलग मुठभेड़ों में 231 नक्सली मारे गए हैं। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि नक्सलवाद के खिलाफ सरकार और सुरक्षा बलों का दबाव निरंतर बढ़ रहा है।