काठमांडू: नेपाल की राजनीति में इस वक्त हलचल तेज है। नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को कोई भी तत्काल राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि उन्हें फिलहाल कोई तुरंत जमानत नहीं दी जाएगी और पुलिस रिमांड की निर्धारित अवधि पूरी करनी होगी।
क्या है पूरा मामला?
यह पूरा मामला सितंबर 2025 में नेपाल में हुए ‘जेन-जी’ (Gen-Z) आंदोलन से जुड़ा है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिसिया कार्रवाई में करीब 77 लोगों की जान चली गई थी। केपी शर्मा ओली की तत्कालीन सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग और गोली चलवाने के गंभीर आरोप लगे थे। इसी मामले में गृह मंत्रालय की ओर से दर्ज आधिकारिक शिकायत के बाद पिछले महीने केपी ओली और पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को गिरफ्तार किया गया था।
अदालत का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने जिला अदालत द्वारा दी गई पुलिस रिमांड की अवधि को बरकरार रखा है। हालांकि, अदालत ने पुलिस को सख्त निर्देश दिए हैं कि रिमांड की अवधि अब और नहीं बढ़ाई जाएगी। कोर्ट ने आदेश दिया है कि:
- आगामी गुरुवार तक पुलिस अपनी सभी पूछताछ पूरी कर ले।
- रिमांड की अवधि समाप्त होते ही दोनों नेताओं की रिहाई सुनिश्चित की जाए।
- जांच की शेष प्रक्रिया हिरासत के बाहर रहकर पूरी की जाएगी।
सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक समीकरण
गौरतलब है कि इन प्रदर्शनों और भारी हिंसा के बाद नेपाल में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए थे। केपी शर्मा ओली की सरकार गिर गई और उसके बाद बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ। वर्तमान सरकार ने उस दौरान हुई मौतों की जिम्मेदारी तय करने के लिए सख्त रुख अपनाया है।