28 साल बाद गरीब किसानों को मिलेगा हक, हाईकोर्ट ने दिया बड़ा फैसला
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले के भूमिहीन किसानों को 1997 में आवंटित जमीन का कब्जा दिलाने का आदेश दिया। प्रशासन को बटांकन और सीमांकन पूरा करने के निर्देश।
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छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मुंगेली जिले के गरीब भूमिहीन किसानों के हक में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कलेक्टर और तहसीलदार को निर्देश दिया है कि 1997 में आवंटित शासकीय भूमि को किसानों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर बटांकन और सीमांकन पूरा किया जाए। इसके बाद किसानों को उनकी जमीन पर वास्तविक कब्जा दिलाने का आदेश दिया गया है।
क्या है पूरा मामला?
1997 में ग्राम परसवारा, तहसील लोरमी में 118.2510 हेक्टेयर भूमि में से 18 गरीब भूमिहीन किसानों को एक-एक एकड़ जमीन का पट्टा आवंटित किया गया था। लेकिन 28 साल बीतने के बाद भी यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं की गई, जिससे किसान अपने हक से वंचित रह गए।
इस मामले में रामेश्वर पुरी गोस्वामी और उमेद राम यादव सहित 18 किसानों ने अधिवक्ता मिर्जा हफीज बेग के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर की। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की लापरवाही के कारण वे अब तक भूमि पर कब्जा नहीं पा सके।
वन विभाग ने रोका था खेती कार्य
याचिका में यह भी बताया गया कि वन विभाग के अधिकारियों ने किसानों को उनकी जमीन पर खेती और पौधे लगाने से भी रोक दिया, जिससे उनकी आजीविका पर संकट मंडराने लगा।
हाईकोर्ट का सख्त निर्देश
- राजस्व रिकॉर्ड में भूमि दर्ज की जाए
- बटांकन और सीमांकन की प्रक्रिया पूरी की जाए
- किसानों को जल्द से जल्द उनकी जमीन का कब्जा दिलाया जाए
प्रशासन की देरी पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी
हाईकोर्ट ने माना कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और सरकारी नीतियों के धीमे क्रियान्वयन का उदाहरण है। 16 अगस्त 2022 को इस प्रक्रिया की शुरुआत हुई थी, लेकिन अब तक किसानों को पूरा कब्जा नहीं मिल पाया।
क्या मिलेगा किसानों को?
- आधिकारिक रूप से जमीन पर मालिकाना हक
- खेती करने की आजादी
- वन विभाग का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा
- राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होने के बाद सरकारी योजनाओं का लाभ