दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के समोदा गांव में भाजपा नेता के खेत में मिली अफीम की खेती ने पूरे प्रदेश में हलचल मचा दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब कई चौंकाने वाली जानकारियां सामने आई हैं। पता चला है कि इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश किसी पुलिस इंटेलिजेंस से नहीं, बल्कि गांव के छोटे बच्चों की सूझबूझ से हुआ है।
बच्चों ने ऐसे किया खुलासा घटनाक्रम के अनुसार, होलिका दहन के लिए गांव के बच्चे लकड़ियां इकट्ठा कर रहे थे। इसी दौरान वे पास के एक खेत में ‘चनाबूट’ (चने की फसल) खाने के लालच में घुस गए। वहां उन्हें मक्के की आड़ में उगी अफीम की फसल के आकर्षक डोडे (फल) दिखे। बच्चों ने कौतूहलवश कुछ फल तोड़ लिए और ग्रामीणों को दिखाए। ग्रामीणों ने जब इंटरनेट पर फोटो सर्च की, तो पता चला कि यह अफीम है। इसके बाद सरपंच को सूचना दी गई और पुलिस ने छापेमारी की।
कंटेनर में छिपाकर लाए गए थे बीज जांच में यह बात सामने आई है कि अफीम की खेती के लिए बीजों का परिवहन बेहद शातिराना तरीके से किया गया था। होलिका दहन के एक दिन पहले एक बड़े कंटेनर में कपास (रुई) के बीच छिपाकर अफीम के बीज लाए गए थे। बताया जा रहा है कि राजस्थान के कुछ लोगों को खेती की देखरेख के लिए बुलाया गया था, जिनसे फिलहाल पूछताछ जारी है।
बाउंसर करते थे खेतों की सुरक्षा हैरानी की बात यह है कि खेतों की सुरक्षा के लिए बकायदा बाउंसर तैनात किए गए थे। ग्रामीणों का दावा है कि जिस दिन बच्चे खेत में घुसे थे, उस दिन वहां फायरिंग की आवाज भी सुनी गई थी, जो संभवतः बच्चों को डराने के लिए की गई थी। हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही ये बाउंसर मौके से फरार हो गए।
सियासी गलियारों में हड़कंप चूंकि यह खेत भाजपा नेता विनायक ताम्रकार का बताया जा रहा है, इसलिए मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी इस पर सवाल उठाए हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या दुर्ग जिले के भीतर अफीम से हेरोइन बनाने का कोई गुप्त कारखाना भी संचालित हो रहा था।
जांच का दायरा बढ़ा दुर्ग पुलिस के लिए यह मामला एक बड़ी चुनौती बन गया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस अवैध नेटवर्क के तार कहां-कहां जुड़े हैं और इसमें किन रसूखदार लोगों का हाथ है। 9 एकड़ में फैली इस खेती से करोड़ों रुपये के नशे का कारोबार होने की आशंका जताई जा रही है।