ट्रंप के 50% टैरिफ का असर नहीं, भारत खरीदेगा और रूसी तेल –
ट्रंप के 50% टैरिफ का असर नहीं, भारत खरीदेगा और रूसी तेल -

नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा भारत पर रूसी तेल खरीद के कारण लगाए गए 50% के भारी टैरिफ के बावजूद, भारत ने एक मजबूत रुख अपनाया है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सितंबर महीने में रूस से कच्चे तेल का आयात 10-20% तक बढ़ाने की तैयारी कर रहा है। यह फैसला अमेरिकी टैरिफ का सीधा जवाब माना जा रहा है।
ट्रंप प्रशासन का टैरिफ और भारत का रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने भारत के कुछ सामानों पर शुल्क को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया है। यह कदम विशेष रूप से रूसी तेल की खरीद को रोकने के लिए उठाया गया है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि भारत यूक्रेन युद्ध का लाभ उठाकर मुनाफाखोरी कर रहा है, जबकि भारतीय अधिकारियों ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है
ट्रंप की चेतावनी और भारत की प्रतिक्रिया
ट्रंप के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने भारत को चेतावनी दी थी कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता है, तो टैरिफ नहीं हटाए जाएंगे। इसके जवाब में, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के रुख को ‘अनुचित और तर्कहीन’ बताया और कहा कि अगर अमेरिका को भारत से तेल खरीदने में दिक्कत है तो वह न खरीदे। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोप भी भारत की तुलना में रूस से अधिक व्यापार करता है, तो केवल भारत को निशाना क्यों बनाया जा रहा है।
व्यापार पर प्रभाव और भारत का फायदा
अमेरिकी टैरिफ के कारण भारतीय निर्यात पर नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे लगभग 48.2 अरब डॉलर का निर्यात प्रभावित हो सकता है, जिससे कपड़ा, चमड़ा और हीरे जैसे क्षेत्रों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। हालांकि, रूसी तेल पर भारी छूट मिलने से भारत को सालाना 2.5 अरब डॉलर तक की बचत हो रही है, जिससे भारत अपने घरेलू बाजार को स्थिर रखने और महंगाई को नियंत्रित करने में सफल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे पूरी दुनिया पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
यह स्थिति भारत के लिए एक कूटनीतिक चुनौती है, जिसमें उसे अपनी ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए अमेरिका के साथ संबंधों को संतुलित करना है।