अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में अमेरिकी सेना को दुनिया की अब तक की सबसे शक्तिशाली ताकत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप प्रशासन साल 2027 तक अमेरिका के रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 125 लाख करोड़ रुपये) करने की योजना बना रहा है। यह आंकड़ा न केवल ऐतिहासिक है, बल्कि वैश्विक रक्षा समीकरणों को पूरी तरह से बदल देने वाला है।
सैन्य आधुनिकीकरण पर जोर
ट्रंप का मुख्य उद्देश्य “शक्ति के माध्यम से शांति” (Peace through Strength) की नीति को लागू करना है। इस बजट का एक बड़ा हिस्सा अत्याधुनिक हथियारों, हाइपरसोनिक मिसाइलों, एआई-संचालित युद्ध प्रणालियों और अंतरिक्ष आधारित रक्षा (Space Force) के आधुनिकीकरण पर खर्च किया जाएगा। ट्रंप का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में अमेरिकी सैन्य बढ़त में जो कमी आई है, उसे इस भारी निवेश के जरिए फिर से हासिल किया जा सकता है।
चीन और रूस पर नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी बजट वृद्धि का सीधा लक्ष्य चीन की बढ़ती सैन्य ताकत और रूस के आक्रामक रुख को नियंत्रित करना है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के दबदबे को चुनौती देने के लिए अमेरिका अपनी नौसेना और वायुसेना की मारक क्षमता को दोगुना करना चाहता है। 1.5 ट्रिलियन डॉलर का यह बजट चीन के वर्तमान रक्षा बजट से कई गुना अधिक होगा, जो वैश्विक स्तर पर अमेरिका की ‘सुपरपावर’ स्थिति को और मजबूत करेगा।
घरेलू चुनौतियां और अर्थव्यवस्था
हालांकि, इतने बड़े बजट को मंजूरी दिलाना ट्रंप के लिए आसान नहीं होगा। अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में राजकोषीय घाटे और बढ़ते कर्ज को लेकर बहस छिड़ सकती है। आलोचकों का तर्क है कि स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सामाजिक क्षेत्रों की कीमत पर सैन्य खर्च बढ़ाना अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम भरा हो सकता है। लेकिन ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता करना भविष्य में कहीं अधिक महंगा साबित होगा।