दिल्ली विधानसभा का शीतकालीन सत्र सोमवार (5 जनवरी, 2026) को हंगामेदार तरीके से शुरू हुआ। सत्र के पहले ही दिन उपराज्यपाल (LG) विनय कुमार सक्सेना के अभिभाषण के दौरान विपक्षी आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायकों ने सदन के भीतर जबरदस्त नारेबाजी और हंगामा किया। स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई कि विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) विजेंद्र गुप्ता को मार्शल बुलाकर विधायकों को सदन से बाहर निकालने का आदेश देना पड़ा।
हंगामे की मुख्य वजह सत्र की शुरुआत होते ही जैसे ही उपराज्यपाल ने अपना अभिभाषण शुरू किया, आम आदमी पार्टी के विधायकों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। विधायक संजीव झा के नेतृत्व में ‘आप’ सदस्यों ने प्रदूषण और चुनावी वादों को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा सरकार को घेरा। विधायकों का आरोप था कि भाजपा ने चुनाव के दौरान महिलाओं को 2500 रुपये देने जैसे जो वादे किए थे, उन्हें पूरा नहीं किया गया। इसके अलावा, दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय से महापुरुषों की तस्वीरें हटाने के पुराने विवाद को लेकर भी सदन में शोर-शराबा हुआ।
मार्शल का इस्तेमाल और निष्कासन अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने हंगामा कर रहे विधायकों को बार-बार शांत रहने और सदन की गरिमा बनाए रखने की चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि संवैधानिक परंपरा के अनुसार उपराज्यपाल के अभिभाषण में बाधा डालना अनुचित है। हालांकि, जब विधायक नहीं माने और सदन के बीचों-बीच (वेल) आकर नारेबाजी करने लगे, तो स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें सदन की कार्यवाही से बाहर करने का निर्देश दिया।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच वार-पलटवार दूसरी ओर, भाजपा सरकार ने इस सत्र में पूर्व मुख्यमंत्री के आवास (शीशमहल) के रख-रखाव और जल बोर्ड में अनियमितताओं से संबंधित सीएजी (CAG) रिपोर्ट पेश करने की तैयारी की है। सरकार का कहना है कि ‘आप’ इन भ्रष्टाचार के मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए हंगामा कर रही है। वहीं ‘आप’ का दावा है कि सरकार जनहित के मुद्दों पर जवाब देने से भाग रही है। चार दिवसीय यह सत्र 8 जनवरी तक चलेगा, जिसके और भी अधिक हंगामेदार रहने के आसार हैं।