इस साल कर्तव्य पथ पर आयोजित होने वाली गणतंत्र दिवस परेड न केवल भारत की सैन्य शक्ति और सांस्कृतिक विविधता का प्रदर्शन करेगी, बल्कि इसमें भारतीय सेना के उन ‘साइलेंट वॉरियर्स’ का भी जलवा दिखेगा जो दुर्गम इलाकों में देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं। भारतीय सेना के पशु दल, जिनमें सजे-धजे ऊंट, फुर्तीले घोड़े और पहली बार शामिल होने वाले शिकारी पक्षी शामिल हैं, इस बार आकर्षण का मुख्य केंद्र होंगे।
रेगिस्तान के जहाज और अश्व दल का वैभव
सीमा सुरक्षा बल (BSF) का प्रसिद्ध ऊंट दस्ता अपनी पारंपरिक वेशभूषा और बैंड के साथ परेड की शोभा बढ़ाएगा। ये ऊंट थार रेगिस्तान की विषम परिस्थितियों में गश्त के लिए सेना की रीढ़ माने जाते हैं। इनके साथ ही सेना के घुड़सवार दस्ते के शानदार घोड़े अपनी अनुशासनबद्ध चाल से दर्शकों का मन मोह लेंगे। ये अश्व दल न केवल परेड की परंपरा का हिस्सा हैं, बल्कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रसद पहुंचाने और गश्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पहली बार शामिल होंगे शिकारी पक्षी (Birds of Prey)
इस साल की परेड की सबसे बड़ी विशेषता सेना द्वारा प्रशिक्षित शिकारी पक्षियों, जैसे बाज और चील का प्रदर्शन हो सकता है। भारतीय सेना पिछले कुछ समय से ड्रोन रोधी (Anti-Drone) क्षमताओं को बढ़ाने के लिए इन पक्षियों को प्रशिक्षित कर रही है। सीमा पार से आने वाले दुश्मन के छोटे ड्रोन्स को पहचानने और उन्हें हवा में ही नष्ट करने में ये पक्षी बेजोड़ साबित हो रहे हैं। परेड में इनकी उपस्थिति सेना के आधुनिक और प्राकृतिक युद्ध कौशल के अनूठे मेल को प्रदर्शित करेगी।
सेवा और समर्पण का प्रतीक
ये पशु दल केवल प्रदर्शन के लिए नहीं हैं; वे ‘साइलेंट वॉरियर्स’ के रूप में सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर कच्छ के रण तक सेना की मदद करते हैं। परेड में इनका शामिल होना उनके प्रति सम्मान व्यक्त करने का एक तरीका है। यह दर्शाता है कि तकनीक के इस युग में भी, प्रकृति और पशुओं का साथ भारतीय सेना की अजेय शक्ति का एक अभिन्न हिस्सा बना हुआ है।