मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने बड़ा सैन्य कदम उठाते हुए हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर भारी बमबारी की है। अमेरिकी सेना ने 5,000 पाउंड वजनी “बंकर बस्टर” बमों का इस्तेमाल कर ईरान के भूमिगत और मजबूत सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ये हमले ईरान के उन एंटी-शिप मिसाइल सिस्टम पर किए गए जो अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी के लिए बड़ा खतरा बन चुके थे।
क्यों किया गया हमला?
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। हाल के दिनों में ईरान ने यहां खदानें (माइंस), ड्रोन और मिसाइल तैनात कर रास्ता लगभग बंद कर दिया था, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई।
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई समुद्री रास्ते को फिर से खोलने और वैश्विक व्यापार को सुरक्षित करने के लिए की गई है।
कैसे हुए हमले?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के तटीय इलाकों में मौजूद मजबूत बंकरों और मिसाइल साइट्स पर सटीक हमले किए। “बंकर बस्टर” बम खास तौर पर जमीन के अंदर छिपे ठिकानों को नष्ट करने के लिए बनाए जाते हैं।
इन ठिकानों में एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें तैनात थीं, जो समुद्र की सतह के करीब उड़कर जहाजों को निशाना बना सकती हैं और उन्हें रोकना बेहद मुश्किल होता है।
बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
इस हमले के बाद पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। पहले से जारी संघर्ष में ईरान, अमेरिका और उसके सहयोगी देश आमने-सामने हैं। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।
आगे क्या?
अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने के लिए आगे भी कार्रवाई जारी रख सकता है। वहीं, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति, ऊर्जा बाजार और सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा असर डाल दिया है।