महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों (Tribal Hostels) की बदहाल स्थिति और छात्राओं के कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट के मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति गर्मा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर इन गंभीर समस्याओं पर तुरंत संज्ञान लेने की मांग की है।
असुरक्षित सुविधाएं और प्रेग्नेंसी टेस्ट के आरोप राहुल गांधी ने बताया कि हाल ही में पुणे में आदिवासी छात्रों से मुलाकात के दौरान उन्हें छात्रावासों में व्याप्त कुप्रबंधन की जानकारी मिली। छात्रों के अनुसार, हॉस्टलों में असुरक्षित सुविधाएं, घटिया भोजन और स्वास्थ्य संबंधी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है।
इसके साथ ही राहुल गांधी ने एक चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि लंबी छुट्टियों के बाद हॉस्टल वापस लौटने वाली छात्राओं का कथित रूप से ‘प्रेग्नेंसी टेस्ट’ कराया जाता है। उन्होंने इसे छात्राओं की निजता, स्वाभिमान और मानवीय गरिमा का सीधा उल्लंघन करार दिया है।
30 वर्ष की उम्र सीमा का विरोध पत्र में राहुल गांधी ने छात्रावासों में रहने के लिए तय की गई 30 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पर भी आपत्ति जताई है। उनका तर्क है कि:
- दूर-दराज और पिछड़े इलाकों से आने वाले कई आदिवासी छात्र 30 की उम्र के बाद भी अपनी उच्च शिक्षा पूरी करते हैं।
- ढेरों अभ्यर्थी इस उम्र के बाद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जुटे रहते हैं।
- ऐसे में यह कड़ा नियम उनकी पढ़ाई और उज्ज्वल भविष्य के रास्ते में बड़ी रुकावट बन सकता है।
राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री से आदिवासी छात्र प्रतिनिधियों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी समस्याओं को सुनने और जल्द समाधान निकालने की अपील की है।
महाराष्ट्र सरकार का पलटवार विपक्ष के इन हमलावर तेवरों के बीच महाराष्ट्र के आदिवासी विकास मंत्री अशोक उइके ने राहुल गांधी के दावों को खारिज किया है। उइके ने कहा कि छात्रों का आंदोलन बहुत पहले ही समाप्त हो चुका था और राहुल गांधी को जमीनी स्थिति की पूरी जानकारी नहीं है।
हालिया घटनाक्रम के बाद अब छात्रावासों के प्रशासनिक नियमों, छात्राओं की निजता के अधिकार और सुविधाओं को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर काफी तेज हो गया है।