देश भर में चीनी की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने के साथ-साथ बाजार में इसकी उपलब्धता बढ़ाने के लिए कच्ची चीनी (Raw Sugar) के आयात नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं।
कीमतों में 29% तक का उछाल सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत ₹48.73 प्रति किलो से बढ़कर ₹63.05 प्रति किलो पर पहुंच गई है। महज कुछ ही हफ्तों में आई इस 29% की तेजी ने आम उपभोक्ता के बजट पर सीधा असर डाला है।
सरकार के नए नियम और रणनीतिक कदम
- 10 लाख मीट्रिक टन ड्यूटी-फ्री आयात: सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है ताकि घरेलू सप्लाई मजबूत हो सके।
- हर खेप के लिए अलग डेडलाइन: पुरानी व्यवस्था के विपरीत, अब आयातित चीनी को बेचने की कोई एक अंतिम तिथि नहीं होगी। आयातकों को हर खेप (Shipment) की एंट्री के बाद एक तय सीमा के भीतर उसे रिफाइन करके तुरंत बाजार में उतारना अनिवार्य होगा।
- स्टॉक रोकने पर पाबंदी: इस नए नियम का सीधा उद्देश्य आयातकों द्वारा लंबे समय तक स्टॉक को दबाकर (जमाखोरी) कृत्रिम कमी पैदा करने की कोशिशों को पूरी तरह ध्वस्त करना है।
त्योहारी सीजन और उद्योग संगठन का पक्ष आगामी त्योहारों में चीनी की मांग चरम पर होती है। सरकार का लक्ष्य सीजन शुरू होने से पहले ही बाजार में पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। दूसरी ओर, चीनी उद्योग संगठनों का दावा है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और त्योहारी मांग के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। उद्योग विशेषज्ञों के अनुसार, हालिया तेजी के पीछे मौसम के असर के अलावा सट्टेबाजी और जमाखोरी मुख्य वजह रही है।
सरकार की इस त्वरित कार्रवाई और आयात नियमों में सख्ती के बाद, आने वाले दिनों में चीनी के खुदरा दामों में गिरावट और राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।