भारत की समुद्री ताकत को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया जा सकता है। भारतीय नौसेना की बहुप्रतीक्षित नेक्स्ट जनरेशन कॉर्वेट (NGC) परियोजना को जल्द ही अंतिम सरकारी मंजूरी मिलने की संभावना है। करीब ₹40,000 करोड़ की इस परियोजना के तहत नौसेना के लिए 8 अत्याधुनिक युद्धपोत तैयार किए जाएंगे, जिन्हें लंबी दूरी की ब्रह्मोस मिसाइलों से लैस किया जाएगा।
इन नए युद्धपोतों का उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा और आक्रामक क्षमता को बढ़ाना है। युद्धपोतों में आधुनिक रडार, उन्नत सेंसर, एंटी-सबमरीन वारफेयर सिस्टम और स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे दुश्मन के लिए उन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल होगा।
योजना के अनुसार, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) पांच युद्धपोतों का निर्माण कर सकता है, जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (GSL) को तीन जहाजों की जिम्मेदारी मिल सकती है। परियोजना को पहले ही रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से मंजूरी मिल चुकी है और अब अंतिम स्वीकृति का इंतजार है।
इन कॉर्वेट युद्धपोतों में विस्तारित रेंज वाली ब्रह्मोस मिसाइलें तैनात की जाएंगी, जो समुद्र और जमीन दोनों पर सटीक हमला करने में सक्षम हैं। इससे नौसेना की स्ट्राइक क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना न केवल भारतीय नौसेना को अधिक ताकतवर बनाएगी, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी बढ़ावा देगी। हाल के वर्षों में नौसेना लगातार स्वदेशी युद्धपोतों और रक्षा प्रणालियों को शामिल कर रही है, जिससे भारत की समुद्री शक्ति तेजी से बढ़ रही है।
परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलने के बाद यह भारतीय नौसेना के आधुनिकीकरण कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक साबित हो सकती है, जो आने वाले वर्षों में हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक बढ़त को और मजबूत करेगी।