बीजिंग: भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाने वाले चीन ने एक बार फिर दुनिया को चौंका दिया है। चीन की एक सैन्य अदालत ने देश के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों—ली शांगफू (Li Shangfu) और वेई फेंगहे (Wei Fenghe) को भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के गंभीर आरोपों में दोषी पाते हुए मौत की सजा सुनाई है। अदालत ने न केवल उन्हें प्राणदंड दिया है, बल्कि उनकी पूरी चल-अचल संपत्ति को भी जब्त करने का आदेश जारी किया है।
क्या हैं आरोप?
सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, ली शांगफू और वेई फेंगहे पर अपने पद का दुरुपयोग करने, रक्षा सौदों में भारी रिश्वत लेने और दूसरों को फायदा पहुंचाने के आरोप सिद्ध हुए हैं। ली शांगफू को पिछले साल अक्टूबर में अचानक उनके पद से हटा दिया गया था, जिसके बाद वे महीनों तक लापता रहे थे। अब आधिकारिक तौर पर यह खुलासा हुआ है कि वे सैन्य अनुशासन जांच एजेंसी के घेरे में थे।
रॉकेट फोर्स और हथियारों की खरीद में बड़ा घोटाला
जांच में पाया गया कि यह भ्रष्टाचार विशेष रूप से चीन की पीएलए (PLA) रॉकेट फोर्स और सैन्य उपकरण खरीद विभाग से जुड़ा था। रॉकेट फोर्स चीन की वह इकाई है जो परमाणु मिसाइलों का नियंत्रण करती है। आरोप है कि इन पूर्व मंत्रियों की गतिविधियों से चीनी सेना की छवि और हथियारों के विकास की गुणवत्ता को भारी नुकसान पहुँचा है।
सजा में एक ‘पेच’
चीनी कानून के अनुसार, इन दोनों को फिलहाल 2 साल की जेल में रखा जाएगा (Suspended Death Sentence)। अगर इस अवधि के दौरान वे कोई नया अपराध नहीं करते हैं और उनका व्यवहार सुधारात्मक रहता है, तो मौत की सजा को आजीवन कारावास में बदला जा सकता है। हालांकि, यह कदम राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य सेना के भीतर पूरी तरह सफाई करना है।
शी जिनपिंग का सख्त संदेश
ली शांगफू और वेई फेंगहे दोनों ही चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) के कद्दावर नेता रहे हैं। वेई फेंगहे तो रॉकेट फोर्स के कमांडर भी रह चुके थे। उन्हें पार्टी से पहले ही निष्कासित किया जा चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी सजा सुनाकर शी जिनपिंग ने यह साफ कर दिया है कि भ्रष्टाचार के मामले में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो।