कोलकाता: पश्चिम बंगाल के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पद संभालने के साथ ही राज्य की कानून-व्यवस्था और ध्वनि प्रदूषण को लेकर कड़े तेवर दिखाए हैं। मुख्यमंत्री ने पूरे राज्य में मंदिरों, मस्जिदों और सभी सार्वजनिक स्थलों पर ऊँची आवाज़ में बजने वाले लाउडस्पीकर्स पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है。
ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार, यह फैसला बढ़ते ध्वनि प्रदूषण और आम जनता, विशेषकर छात्रों और बुजुर्गों को होने वाली परेशानी को देखते हुए लिया गया है。 सरकार ने स्पष्ट किया है कि:
- धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर का उपयोग केवल निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर ही किया जा सकेगा。
- बिना अनुमति के लगाए गए अवैध लाउडस्पीकरों को पुलिस द्वारा तुरंत जब्त किया जाएगा。
- अस्पतालों और स्कूलों के आसपास के ‘साइलेंस जोन’ में किसी भी प्रकार के लाउडस्पीकर के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा。
समान नागरिक संहिता की ओर संकेत?
सुवेंदु अधिकारी ने इस फैसले को लागू करते हुए कहा कि कानून सबके लिए बराबर है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि इस आदेश का पालन बिना किसी भेदभाव के कराया जाए, चाहे वह मंदिर हो, मस्जिद हो या कोई अन्य सार्वजनिक कार्यक्रम। राजनीतिक जानकार इसे राज्य में तुष्टीकरण की राजनीति को खत्म करने और एक समान प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने के भाजपा के चुनावी वादे से जोड़कर देख रहे हैं。
अधिकारियों को सख्त चेतावनी
मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को आदेश दिया है कि यदि किसी भी इलाके में निर्धारित समय (रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक) के बाद या तय सीमा से अधिक शोर सुनाई देता है, तो संबंधित थाने के प्रभारी जवाबदेह होंगे। इसके लिए राज्य भर में ध्वनि प्रदूषण मापने वाले यंत्रों (Sound Level Meters) के साथ विशेष दस्तों की तैनाती की जा रही है。
विपक्ष की प्रतिक्रिया
जहाँ आम जनता के एक बड़े वर्ग ने शांति और सुकून के लिहाज से इस फैसले का स्वागत किया है, वहीं विपक्ष ने इसे निशाना बनाने वाली राजनीति करार दिया है। हालांकि, सुवेंदु सरकार का कहना है कि यह कदम केवल प्रदूषण नियंत्रण और अदालती दिशानिर्देशों के अनुपालन के लिए उठाया गया है。