भारत-UAE के बीच ऐतिहासिक ‘ऊर्जा डील’: अबू धाबी पहुंचे पीएम मोदी, राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद के साथ LPG समझौते पर किए हस्ताक्षर!

अबू धाबी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दिवसीय द्विपक्षीय यात्रा पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की राजधानी अबू धाबी पहुंचे, जहाँ उनका भव्य और आत्मीय स्वागत किया गया। अबू धाबी के हवाई अड्डे पर स्वयं यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी की। यह मुलाकात न केवल कूटनीतिक लिहाज से महत्वपूर्ण रही, बल्कि दोनों देशों के बीच बढ़ते ‘भाईचारे’ और रणनीतिक साझेदारी की एक नई तस्वीर भी पेश की।

ऊर्जा सुरक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा का सबसे मुख्य आकर्षण भारत और यूएई के बीच हुआ LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) आपूर्ति समझौता रहा। भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में यह एक गेम-चेंजर साबित होगा। इस समझौते के तहत:

  • भारत को यूएई से दीर्घकालिक आधार पर एलपीजी की निरंतर और सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
  • यह डील न केवल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि वैश्विक बाजार में कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव से भी राहत दिलाएगी।

राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय वार्ता

हवाई अड्डे पर गर्मजोशी से स्वागत के बाद दोनों नेताओं के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ता हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद को अपना ‘भाई’ संबोधित करते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और यूएई के संबंध नई ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं। व्यापार, निवेश, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।

व्यापार और आर्थिक साझेदारी पर जोर

भारत और यूएई के बीच हुए ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) की सफलता पर भी दोनों नेताओं ने खुशी जताई। यूएई भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है और प्रधानमंत्री की इस यात्रा से आने वाले समय में भारतीय उत्पादों के लिए खाड़ी देशों के बाजार और अधिक सुलभ होने की उम्मीद है।

क्षेत्रीय शांति और स्थिरता

नेताओं ने पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) की मौजूदा स्थितियों पर भी विचार-विमर्श किया। दोनों देशों ने क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर लड़ने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।

प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि खाड़ी देशों के साथ भारत के संबंध अब महज तेल की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक गहरी रणनीतिक और भावनात्मक साझेदारी में तब्दील हो चुके हैं।


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