नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर गर्माए CJP (छात्र आंदोलन) को अब देश के जाने-माने समाजसेवी अन्ना हजारे का बड़ा नैतिक समर्थन मिल गया है। आंदोलन के समर्थन में आते हुए अन्ना हजारे ने सीधा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने दो टूक कहा कि लोकतंत्र में युवाओं और जनता की आवाज़ दबाना सही नहीं है; सरकार को छात्रों की मांगों को बल प्रयोग के बजाय संवाद से सुलझाना चाहिए।
📩 PM मोदी को पत्र में क्या लिखा अन्ना ने?
अन्ना हजारे ने अपने पत्र में हाल ही में हुए पुलिस एक्शन और हिंसा पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा:
- संवाद ही लोकतंत्र की ताकत: “लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी रास्ता आपसी बातचीत है, लाठी-डंडा नहीं।”
- सीधी वार्ता की मांग: “सरकार छात्रों की मांगों को अनदेखा करने के बजाय उनके प्रतिनिधियों को मेज पर बुलाए और सीधे बात करे।”
- शांति की अपील: “सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना या पुलिस द्वारा अत्यधिक बल प्रयोग करना—दोनों ही रास्ते किसी समाधान तक नहीं ले जाते।”
बड़ी चेतावनी: अन्ना हजारे ने संकेत दिया है कि यदि केंद्र सरकार जल्द ही कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो वह स्वयं दिल्ली आकर आंदोलनकारियों के साथ मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटेंगे।
🚨 संसद मार्च के बाद बढ़ा तनाव
शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा धांधली पर रोक और पारदर्शिता की मांग को लेकर हजारों छात्र जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। हाल ही में हुए ‘संसद मार्च’ के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी, जिसके बाद से यह आंदोलन पूरे देश के मीडिया में छाया हुआ है।
💡 क्या पड़ेगा असर?
अन्ना हजारे के इस एंट्री के बाद CJP आंदोलन को भारी सामाजिक और नैतिक मजबूती मिली है। उनके इस कदम से सरकार पर बातचीत का दबाव काफी बढ़ गया है। अब देखना यह होगा कि क्या केंद्र सरकार संवाद का रास्ता अपनाती है या यह आंदोलन और बड़ा रूप लेता है।