शेयर बाजार में अगस्त का महीना चीनी कंपनियों के शेयरों के लिए जबरदस्त साबित हुआ है। बाजार में शुगर स्टॉक्स को लेकर निवेशकों में भारी उत्साह देखने को मिला, जिसके चलते कई कंपनियों के शेयरों ने महज एक महीने में 20 फीसदी से लेकर 60 फीसदी तक का शानदार रिटर्न दिया। इस पूरे सेक्टर में सबसे आगे रही अवध शुगर एंड एनर्जी, जिसके शेयर ने अगस्त में करीब 59.35 फीसदी की जोरदार छलांग लगाई। 31 जुलाई को 504 रुपये के आसपास ट्रेड कर रहा यह शेयर अगस्त के अंत तक बढ़कर 804 रुपये के पार पहुंच गया, यानी सिर्फ एक महीने में निवेशकों को प्रति शेयर लगभग 300 रुपये का सीधा फायदा हुआ।
अवध शुगर के अलावा सेक्टर की अन्य कंपनियों में भी चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। द्वारिकेश शुगर इंडस्ट्रीज में 38 फीसदी और डालमिया भारत शुगर में करीब 35.6 फीसदी से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। वहीं त्रिवेणी इंजीनियरिंग, धामपुर शुगर मिल्स, धामपुर बायो ऑर्गेनिक्स और बजाज हिंदुस्तान शुगर जैसे स्टॉक्स ने भी निवेशकों को 26 से 27 फीसदी का दमदार रिटर्न दिया। इसके साथ ही द उगार शुगर वर्क्स में 24 फीसदी और डीसीएम श्रीराम इंडस्ट्रीज में 19 फीसदी से ज्यादा की मजबूती आई।
सेक्टर की प्रमुख और बड़ी कंपनियों की बात करें तो बलरामपुर चीनी मिल्स का शेयर 10.6 फीसदी से ज्यादा की बढ़त के साथ 648 रुपये के स्तर पर पहुंच गया। इसके अलावा श्री रेणुका शुगर्स, ईआईडी-पैरी और जुआरी इंडस्ट्रीज में भी 4 से 7 फीसदी तक की बढ़त देखने को मिली। हालांकि, पूरे सेक्टर में माहौल एक जैसा नहीं रहा और कुछ शेयरों में कमजोरी भी आई, जिसमें गोदावरी बायोरिफाइनरीज का शेयर करीब 8.5 फीसदी फिसलकर 239 रुपये के आसपास आ गया।
शुगर शेयरों में इस जोरदार तेजी की मुख्य वजह घरेलू और वैश्विक स्तर पर चीनी की सप्लाई को लेकर बनी चिंताएं और इसके चलते चीनी की कीमतों में आई मजबूती है। ऊंचे दामों की वजह से मिलों को बेहतर मार्जिन और मुनाफा बढ़ने की उम्मीद है। इसके अलावा, अब चीनी कंपनियां सिर्फ चीनी बिक्री तक सीमित नहीं हैं। सरकार की E20 पॉलिसी, यानी पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल ब्लेंडिंग के लक्ष्य और बायोफ्यूल कारोबार ने भी इन कंपनियों के लिए कमाई के नए रास्ते खोल दिए हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा और बढ़ा है।
हालांकि, एक महीने में 20 से 60 फीसदी की तेज रैली के बाद अब बाजार के जानकारों की नजर कंपनियों के वैल्यूएशन पर टिकी है। अगर आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के वित्तीय नतीजे बाजार की उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे, तो ऊपरी स्तरों से मुनाफावसूली यानी प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिल सकती है। आगे चलकर शुगर स्टॉक्स की चाल चीनी और एथेनॉल की कीमतों, गन्ने के उत्पादन, लागत और सरकारी नीतियों पर काफी हद तक निर्भर करेगी।