पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच अगस्त 2026 में हुए ‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’ के बाद अब बांग्लादेश के भी इसमें शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस समझौते के तहत किसी एक देश पर हमला सभी सदस्य देशों पर हमला माना जाएगा, जिसे विशेषज्ञ ‘इस्लामिक NATO’ के रूप में देख रहे हैं।
तुर्की के प्रमुख समाचार पत्र येनी शफाक में छपे एक लेख के अनुसार, बांग्लादेश अपनी सैन्य क्षमता को आधुनिक बनाने और सुरक्षा विकल्पों का विस्तार करने के लिए इस गुट से जुड़ सकता है।
बांग्लादेश के संभावित कदम के मुख्य बिंदु:
- रणनीतिक बदलाव: भारत पर अपनी पारंपरिक निर्भरता को कम करते हुए ढाका, चीन, पश्चिमी शक्तियों और मध्य-पूर्व के देशों के साथ संतुलन बनाने की कोशिश में है।
- रक्षा आधुनिकीकरण: बांग्लादेश तुर्की की उन्नत ड्रोन तकनीक और सैन्य उपकरणों में गहरी रुचि दिखा रहा है।
- बढ़ते क्षेत्रीय संबंध: पाकिस्तान और तुर्की के साथ बांग्लादेश का रक्षा सहयोग हाल के दिनों में तेजी से बढ़ा है।
भारत पर प्रभाव
यदि बांग्लादेश इस बहुपक्षीय रक्षा समझौते का हिस्सा बनता है, तो दक्षिण एशिया का सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। भारत के ठीक पड़ोस में पाकिस्तान और तुर्की की बढ़ती सैन्य मौजूदगी नई सामरिक चुनौतियां खड़ी कर सकती है।
हालाँकि, अभी तक बांग्लादेश सरकार की ओर से इस समझौते में शामिल होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल कूटनीतिक विशेषज्ञ इसे केवल एक संभावित रणनीतिक परिदृश्य के रूप में देख रहे हैं।