कर्नाटक की राजनीति से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है। वाल्मीकि निगम फंड में कथित वित्तीय गड़बड़ी के आरोपों से घिरे मंत्री बी. नागेंद्र ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार को अपना त्यागपत्र सौंपा। गौरतलब है कि महज 25 दिन पहले ही नागेंद्र को दोबारा कैबिनेट में शामिल कर योजना एवं सांख्यिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
क्या है पूरा विवाद? इस पूरे मामले की शुरुआत मई 2024 में महार्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के अकाउंट्स सुपरिंटेंडेंट पी. चंद्रशेखरन के सुसाइड के बाद हुई थी। सुसाइड नोट में निगम के खाते से करीब 89.63 करोड़ रुपये के अवैध ट्रांसफर का सनसनीखेज खुलासा हुआ था।
उस समय अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्रालय संभाल रहे बी. नागेंद्र को भारी दबाव के बाद पहला इस्तीफा देना पड़ा था। बाद में 3 अगस्त 2026 को हुए कैबिनेट विस्तार के दौरान उन्हें फिर से मंत्री बनाया गया, लेकिन विपक्ष के लगातार आक्रामक हमलों और बढ़ते राजनीतिक दबाव के चलते 28 अगस्त को उन्हें एक बार फिर कुर्सी छोड़नी पड़ी।
‘मैं बेकसूर हूँ’ – नागेंद्र ने पेश की सफाई इस्तीफा देने के बाद बी. नागेंद्र ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के बेबुनियाद आरोपों से पार्टी की छवि पर कोई असर न पड़े, इसीलिए उन्होंने नैतिकता के आधार पर खुद पद छोड़ने का फैसला किया है।
दूसरी ओर, मुख्य विपक्षी दल ने इस इस्तीफे को अपनी राजनीतिक और नैतिक जीत करार दिया है। फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और सबकी नजरें जांच के अगले रुख पर टिकी हैं।