नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर जारी विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट आगामी 25 अगस्त को इस महत्वपूर्ण मामले पर अपना फैसला सुनाएगा, जिसका सीधा असर देश भर के लगभग 1.68 लाख छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा।
क्या है पूरा मामला?
सीबीएसई कक्षा 12वीं के परिणाम घोषित होने के बाद, बड़ी संख्या में छात्र अपने अंकों से असंतुष्ट थे। छात्रों ने आरोप लगाया कि इस साल अपनाई गई मूल्यांकन पद्धति (विशेषकर डिजिटल या ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम) में गंभीर खामियां थीं, जिसके कारण उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले। इसके बाद, लगभग 1.68 लाख छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया।
विवाद की मुख्य वजह
विवाद तब और गहरा गया जब छात्रों को पुनर्मूल्यांकन आवेदन के लिए बेहद कम समय दिया गया। साथ ही, पुनर्मूल्यांकन पोर्टल में तकनीकी खामियों के कारण कई छात्र समय पर आवेदन नहीं कर सके या प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए। छात्रों का तर्क है कि सीबीएसई की इस ‘जल्दबाजी’ और ‘तकनीकी लापरवाही’ के कारण उन्हें कॉलेज और यूनिवर्सिटी में उच्च शिक्षा के लिए प्रवेश लेने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि कई संस्थानों में एडमिशन प्रक्रिया या तो शुरू हो चुकी है या खत्म होने वाली है।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई और दलीलें
छात्रों की इन समस्याओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई। सुनवाई के दौरान, जस्टिस खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने छात्रों के भविष्य पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने माना कि उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए 12वीं के अंक अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और पुनर्मूल्यांकन में देरी छात्रों के करियर को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है।
शीर्ष अदालत ने सीबीएसई और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। कोर्ट ने विशेष रूप से सीबीएसई से पूछा है कि वह पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया को कैसे सुव्यवस्थित करेगी और जिन छात्रों को पोर्टल की खराबी के कारण परेशानी हुई, उनके हितों की रक्षा कैसे की जाएगी। कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि क्या ऐसे छात्रों को पुनर्मूल्यांकन के लिए अतिरिक्त समय दिया जा सकता है?
25 अगस्त के फैसले पर टिकी निगाहें
अब देश भर के 1.68 लाख छात्रों, उनके अभिभावकों और शिक्षण संस्थानों की निगाहें 25 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनाए जाने वाले फैसले पर टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि सीबीएसई को पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल फिर से खोलना होगा या छात्रों को कोई अन्य राहत दी जाएगी। इस फैसले का देश की शिक्षा प्रणाली और मूल्यांकन प्रक्रियाओं पर भी दूरगामी प्रभाव पड़ने की संभावना है।