बंगाल-बांग्लादेश बॉर्डर पर बढ़ी हलचल, शुभेंदु अधिकारी की ‘डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट’ नीति से मचा हड़कंप

Suvendu Adhikari's "detect-delete-deport" policy

पश्चिम बंगाल में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई अब तेज होती दिखाई दे रही है। राज्य सरकार की ‘डिटेक्ट, डिलीट एंड डिपोर्ट’ नीति के बाद बॉर्डर इलाकों में हलचल बढ़ गई है। उत्तर 24 परगना और मालदा के कई बॉर्डर चेकपोस्टों पर बड़ी संख्या में कथित अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के जुटने की खबर सामने आई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक बशीरहाट सब-डिवीजन के हाकिमपुर चेकपोस्ट पर सौ से ज्यादा लोग वापस बांग्लादेश जाने के लिए पहुंचे। बताया जा रहा है कि ये लोग लंबे समय से पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में रह रहे थे और सरकार की नई नीति के बाद उनमें डर का माहौल बन गया है।

राज्य सरकार ने जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संदिग्ध विदेशी नागरिकों के लिए “होल्डिंग सेंटर” तैयार किए जाएं, जहां उन्हें निर्वासन प्रक्रिया पूरी होने तक रखा जा सके। अधिकारियों के अनुसार इन सेंटरों में सुरक्षा, CCTV निगरानी और रिकॉर्ड सत्यापन की व्यवस्था की गई है।

शुभेंदु अधिकारी की इस नीति की तुलना अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump की इमिग्रेशन पॉलिसी से की जा रही है। ट्रंप ने भी अपने चुनाव अभियान में अवैध प्रवासियों के खिलाफ बड़े स्तर पर डिपोर्टेशन ड्राइव चलाने का वादा किया था। बंगाल सरकार की मौजूदा कार्रवाई को उसी तरह की सख्त नीति माना जा रहा है।

सरकार का कहना है कि जो लोग CAA के दायरे में नहीं आते और जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हाल ही में BSF अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी सीमा सुरक्षा और घुसपैठ रोकने पर जोर दिया गया।

मालदा जिले के होल्डिंग सेंटर में फिलहाल कई संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को रखा गया है। प्रशासन उनकी पहचान और दस्तावेजों की जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार संदिग्ध लोगों को 30 दिनों तक हिरासत में रखा जा सकता है, जिसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई होगी।

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