पश्चिम बंगाल चुनाव: मतदान से पहले अमित शाह की गुप्त बैठक को लेकर सियासी बवाल, TMC ने लगाया साजिश का आरोप

अमित शाह

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। राज्य में दूसरे चरण के मतदान से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की एक कथित गुप्त बैठक ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने दावा किया है कि इस बैठक के जरिए भाजपा राज्य में कोई बड़ा राजनीतिक खेल करने की तैयारी में है।

TMC का बड़ा दावा: बैठक में शामिल होंगे केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुख TMC के राज्यसभा सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि गृह मंत्री अमित शाह ने एक बेहद गोपनीय बैठक बुलाई है। उन्होंने सूत्रों के हवाले से दावा किया कि इस बैठक में सीबीआई (CBI), प्रवर्तन निदेशालय (ED) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के प्रमुखों को भी आमंत्रित किया गया है। टीएमसी का आरोप है कि चुनाव के ठीक पहले केंद्रीय एजेंसियों के प्रमुखों के साथ इस तरह की बैठक करना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है।

कोलकाता में डेरा डाले हुए हैं गृह मंत्री खबरों के अनुसार, गृह मंत्री अमित शाह 27 अप्रैल तक कोलकाता में ही रहने वाले हैं। मंगलवार रात उन्होंने पार्टी के चुनावी प्रभारियों और प्रवासी कार्यकर्ताओं के साथ करीब चार घंटे लंबी बैठक की। भाजपा का कहना है कि यह बैठक जमीनी तैयारियों का जायजा लेने और चुनाव प्रचार की रणनीतियों को अंतिम रूप देने के लिए थी। हालांकि, टीएमसी का मानना है कि भाजपा उन क्षेत्रों को निशाना बना रही है जहाँ वह राजनीतिक रूप से कमजोर है, जैसे कि कोलकाता, हावड़ा, हुगली और उत्तर व दक्षिण 24 परगना।

‘पॉलिटिकल टेररिज्म’ का आरोप टीएमसी नेताओं ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि ममता बनर्जी को हराने के लिए केंद्र सरकार अपनी पूरी मशीनरी का इस्तेमाल कर रही है। डेरेक ओ ब्रायन ने इसे ‘पॉलिटिकल टेररिज्म’ का संकेत बताया और कहा कि अगले कुछ दिनों में राज्य में कोई बड़ा घटनाक्रम देखने को मिल सकता है।

बंगाल चुनाव का गणित पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को होने जा रहा है, जिसमें 16 जिलों की 152 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। इसके बाद दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी और अंतिम परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। भाजपा जहाँ राज्य में सत्ता परिवर्तन का दावा कर रही है, वहीं टीएमसी अपनी सत्ता बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है। एजेंसियों के प्रमुखों के शामिल होने के दावों के बाद राज्य में चुनावी माहौल और भी अधिक तनावपूर्ण हो गया है।

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