बेंगलुरु/मांड्या: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को कर्नाटक के एक दिवसीय दौरे पर पहुंचे, जहाँ उन्होंने आध्यात्मिक और विकास संबंधी कार्यक्रमों में शिरकत की। बेंगलुरु हवाई अड्डे पर पहुँचने पर राज्य के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच संक्षिप्त चर्चा भी हुई, जिसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं।
मुख्यमंत्री ने सौंपा मांगों का पत्र प्रधानमंत्री के आगमन पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उन्हें एक औपचारिक पत्र सौंपा। इस पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री ने कर्नाटक की लंबित 18 महत्वपूर्ण परियोजनाओं की ओर केंद्र का ध्यान आकर्षित किया। इनमें मुख्य रूप से रेलवे विकास, जल जीवन मिशन के तहत परियोजनाएं, ग्राम पंचायतों के लिए अनुदान और राष्ट्रीय राजमार्गों के मरम्मत कार्य शामिल हैं। राज्य सरकार ने इन कार्यों को गति देने के लिए केंद्र से तत्काल सहयोग की अपील की है।
गुरु भैरवैय्या मंदिर का लोकार्पण हवाई अड्डे से प्रधानमंत्री मांड्या जिले के श्री क्षेत्र आदिचुंचनगिरी मठ पहुँचे। यहाँ उन्होंने द्रविड़ वास्तुकला शैली में नवनिर्मित ‘श्री गुरु भैरवैय्या मंदिर’ का उद्घाटन किया। यह मंदिर वोक्कालिगा समुदाय के श्रद्धेय दिवंगत गुरुओं को समर्पित एक भव्य स्मारक है। इस अवसर पर पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा भी उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री और देवेगौड़ा ने संयुक्त रूप से ‘सौंदर्य लहरी’ और ‘शिव महिम्न स्तोत्रम’ नामक पुस्तकों का विमोचन भी किया। मंदिर के उद्घाटन से पूर्व पीएम ने ज्वाला पीठ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
राष्ट्र के नाम ‘नौ संकल्प’ जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के निर्माण की दिशा में नागरिकों से नौ विशिष्ट संकल्प लेने का आह्वान किया:
- जल संरक्षण: जल प्रबंधन और पानी बचाने की प्राथमिकता।
- वृक्षारोपण: ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण।
- स्वच्छता: सार्वजनिक और धार्मिक स्थलों को साफ रखने का प्रण।
- वोकल फॉर लोकल: स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देना।
- पर्यटन: देश के भीतर घरेलू पर्यटन को प्रोत्साहित करना।
- प्राकृतिक खेती: रसायनों से मुक्त खेती को अपनाना।
- मिलेट्स (मोटा अनाज): आहार में मोटे अनाज को शामिल करना।
- योग और फिटनेस: स्वस्थ जीवनशैली के लिए योग को अपनाना।
- संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग: तेल और ऊर्जा की खपत कम करना।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि इन संकल्पों पर चलकर कर्नाटक और भारत तीव्र गति से विकास की नई ऊंचाइयों को छू सकेंगे। यह दौरा न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि राज्य और केंद्र के बीच प्रशासनिक संवाद के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा।