भारत और अमेरिका के बीच चल रही ट्रेड डील वार्ता अब निर्णायक चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों देशों के बीच एक बड़े व्यापारिक समझौते पर बातचीत चल रही है, जिसके तहत भारत अमेरिकी ऊर्जा, टेक्नोलॉजी, कोयला और अन्य उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीद कर सकता है। अनुमान है कि यह खरीद करीब 47 लाख करोड़ रुपये से अधिक की हो सकती है।
अमेरिका की ओर से जारी फैक्ट शीट में कहा गया है कि भारत अमेरिकी उत्पादों की खरीद बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। इसमें ऊर्जा, सूचना एवं संचार तकनीक, कोयला और कई अन्य क्षेत्रों के उत्पाद शामिल हैं। दोनों देशों के बीच यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को नई ऊंचाई तक पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
ट्रेड डील के तहत भारत को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों पर लगने वाले कई टैरिफ कम किए जा सकते हैं, जिससे टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर, मशीनरी और कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय उद्योगों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिल सकती है।
सूत्रों के मुताबिक दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच, डिजिटल ट्रेड, निवेश, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन को मजबूत करने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा जारी है। अमेरिका चाहता है कि भारत कुछ क्षेत्रों में टैरिफ कम करे, जबकि भारत अपने किसानों और MSME सेक्टर के हितों को सुरक्षित रखने पर जोर दे रहा है।
भारत और अमेरिका पहले ही एक-दूसरे के प्रमुख व्यापारिक साझेदार बन चुके हैं। हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है और अब लक्ष्य इसे आने वाले समय में और अधिक विस्तार देने का है। ट्रेड विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह समझौता अंतिम रूप लेता है तो यह दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में ऐतिहासिक बदलाव ला सकता है।
इस संभावित डील को लेकर राजनीतिक और आर्थिक हलकों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां समर्थक इसे भारत के लिए बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं, वहीं कुछ विशेषज्ञ कृषि और घरेलू उद्योगों पर इसके प्रभाव को लेकर सावधानी बरतने की सलाह दे रहे हैं। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच आगे की बातचीत पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।