मालदा, पश्चिम बंगाल: केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल के मालदा (गाजोल और मानिकचक) में चुनावी रैलियों को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस और हुमायूं कबीर को कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी की उपस्थिति में बंगाल की धरती पर कोई भी व्यक्ति बाबरी मस्जिद जैसी किसी संरचना का निर्माण नहीं कर पाएगा।
विवाद की जड़: हुमायूं कबीर का प्रस्ताव यह पूरा विवाद आम जनता उन्नयन पार्टी के प्रमुख और पूर्व टीएमसी नेता हुमायूं कबीर के एक पुराने प्रस्ताव से जुड़ा है। कबीर ने मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बाबरी मस्जिद की तर्ज पर एक मस्जिद बनाने की नींव रखी थी। अमित शाह ने इस मुद्दे को उठाते हुए कबीर को ममता बनर्जी का ‘एजेंट’ करार दिया और आरोप लगाया कि वे मुख्यमंत्री के इशारे पर राज्य का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
ममता बनर्जी पर तीखा प्रहार शाह ने रैली में गरजते हुए कहा, “ममता दीदी और हुमायूं कबीर मेरी बात ध्यान से सुन लें, यह भारत है और यहाँ कोई भी ‘माई का लाल’ बाबरी मस्जिद नहीं बना सकता।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि जहां एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण सुनिश्चित किया, वहीं ममता बनर्जी और उनके सहयोगी इसके विरोध में खड़े रहे हैं। शाह ने विश्वास जताया कि 4 मई को चुनावी नतीजों के साथ ही विपक्ष के ऐसे तमाम “सपने” चकनाचूर हो जाएंगे।
चुनावी समीकरण और मतदान गृहमंत्री ने मतदाताओं से अपील की कि वे बंगाल में घुसपैठ और तुष्टीकरण की राजनीति को समाप्त करने के लिए भाजपा के पक्ष में मतदान करें। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए आगामी 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी।
अमित शाह के इस बयान ने राज्य में धार्मिक और राजनीतिक ध्रुवीकरण को एक नई दिशा दे दी है, जिससे आने वाले चरणों का चुनाव और भी दिलचस्प होने की उम्मीद है।