लोकतंत्र और संविधान पर संकट का आरोप राहुल गांधी ने अपने संबोधन की शुरुआत बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को नमन करते हुए की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा और आरएसएस मिलकर देश के संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी ने कहा कि नेहरू, गांधी और अंबेडकर ने जिस संविधान की नींव रखी थी, आज उसे मिटाने का प्रयास किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा तंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “क्या आपने आजकल प्रधानमंत्री का चेहरा देखा है? उनकी हवा निकल गई है। वह अब मुझसे आंखें नहीं मिला सकते।” उन्होंने दावा किया कि भाजपा आगामी चुनावों में पिछड़ रही है और इसी घबराहट के कारण उनके शीर्ष नेताओं के हाव-भाव बदल गए हैं। राहुल ने भाजपा पर ‘वोट चोरी’ करने और लोकतंत्र को नष्ट करने का भी आरोप लगाया।
ममता सरकार और बेरोजगारी का मुद्दा सिर्फ भाजपा ही नहीं, राहुल गांधी के निशाने पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस (TMC) भी रही। उन्होंने राज्य में बेरोजगारी की गंभीर स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल में लगभग 84 लाख युवाओं ने बेरोजगारी भत्ते के लिए आवेदन किया है, जो राज्य सरकार की विफलताओं का प्रमाण है।
राहुल गांधी ने तर्क दिया कि ममता बनर्जी की नीतियों के कारण ही बंगाल में भाजपा को पैर पसारने का मौका मिला है। उन्होंने कहा, “अगर टीएमसी ने सही तरीके से काम किया होता और युवाओं को रोजगार दिया होता, तो आज बंगाल में भाजपा कहीं नजर नहीं आती।”
नफरत के खिलाफ कांग्रेस का विकल्प कांग्रेस नेता ने जनता से अपील की कि वे नफरत और हिंसा की विचारधारा को छोड़कर विकास और संविधान की रक्षा करने वाली ताकतों का साथ दें। उन्होंने भाजपा को ‘नफरत फैलाने वाली विचारधारा’ और टीएमसी को ‘भाजपा के लिए रास्ता बनाने वाली पार्टी’ करार देते हुए कांग्रेस को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश किया।
राहुल गांधी की इस रैली ने बंगाल के चुनाव मैदान में त्रिकोणीय मुकाबले को और भी दिलचस्प बना दिया है, जहां एक तरफ सत्ताधारी टीएमसी और उभरती भाजपा है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपने खोए हुए जनाधार को वापस पाने की कोशिश कर रही है।