वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (West Asia) में जारी तनाव एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) के तहत स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज (Strait of Hormuz) में फंसे जहाजों को रास्ता दिलाने के ऐलान के बाद ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए सीधी चेतावनी दी है। ईरान की ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ (IRGC) ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिकी सेना ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में घुसने या उसके द्वारा तय किए गए समुद्री कॉरिडोर से बाहर निकलने की कोशिश की, तो इसका अंजाम ‘विनाशकारी’ होगा।
ट्रंप का दांव: शांति या दबाव की राजनीति?
राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में घोषणा की थी कि अमेरिकी नौसेना खाड़ी देशों के अनुरोध पर उन व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित रास्ता दिलाएगी जो पिछले दो महीनों से वहां फंसे हुए हैं। ट्रंप ने इसे ‘मानवीय कदम’ करार दिया है। हालांकि, महज 24 घंटे के भीतर ट्रंप ने एक नया बयान जारी कर इस ऑपरेशन को थोड़े समय के लिए ‘स्थगित’ (Pause) कर दिया है। ट्रंप का दावा है कि ईरान के साथ एक ‘अंतिम समझौते’ (Final Agreement) को लेकर बड़ी प्रगति हुई है और वे शांति को एक मौका देना चाहते हैं।
ईरान का कड़ा रुख: ‘अभी तो हमने शुरुआत भी नहीं की’
ईरान के मुख्य वार्ताकार ने वॉशिंगटन को चेतावनी देते हुए कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ाना अमेरिका के लिए महंगा साबित होगा। ईरानी सेना का कहना है कि वे अपनी समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हैं। ईरान ने यूएई (UAE) पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरों का खंडन किया है, लेकिन साथ ही यह भी दोहराया है कि हॉर्मुज पर उनका नियंत्रण पूरी तरह बना रहेगा। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान ने स्पष्ट किया है कि वे दबाव में आकर आत्मसमर्पण नहीं करेंगे।
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्यों है इतना खास?
दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है। ईरान द्वारा इसे बंद किए जाने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भारी संकट मंडरा रहा है। वर्तमान में लगभग 2,000 जहाज और 20,000 से अधिक नाविक इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं।
आगे क्या होगा?
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान ने व्यापारिक जहाजों पर हमला जारी रखा, तो अमेरिका ‘विनाशकारी जवाबी कार्रवाई’ करेगा। दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची बीजिंग पहुंच गए हैं, जहाँ वे चीन के साथ सुरक्षा और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा कर रहे हैं।
पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुआ संघर्षविराम (Ceasefire) अब खतरे में नजर आ रहा है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप का ‘पीस डील’ का दावा हकीकत बनेगा या खाड़ी क्षेत्र एक नए और भीषण युद्ध की आग में झुलस जाएगा।