देशभर में बुधवार को ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी कंपनियों के खिलाफ मेडिकल स्टोर संचालकों ने एक दिन की हड़ताल की। इस बंद का आह्वान ऑल इंडिया ऑर्गेनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) ने किया, जिसमें करीब 12 से 15 लाख मेडिकल स्टोरों के शामिल होने का दावा किया गया। कई राज्यों में दवा दुकानों के शटर बंद रहे, जिससे मरीजों और आम लोगों को दवाइयों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।
केमिस्ट संगठनों का कहना है कि ऑनलाइन दवा कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर पारंपरिक मेडिकल दुकानों के कारोबार को प्रभावित कर रही हैं। साथ ही बिना पर्याप्त जांच के दवाइयों की डिलीवरी से नकली और प्रतिबंधित दवाओं के गलत इस्तेमाल का खतरा भी बढ़ रहा है। संगठन ने आरोप लगाया कि कई ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म बिना सख्त निगरानी के काम कर रहे हैं।
देश के कई राज्यों — मध्य प्रदेश, गुजरात, पंजाब, झारखंड, तमिलनाडु और ओडिशा में मेडिकल स्टोरों का व्यापक असर देखने को मिला। तमिलनाडु में करीब 40 हजार और गुजरात में 35 हजार से ज्यादा मेडिकल दुकानों के बंद रहने की खबर सामने आई। वहीं मध्य प्रदेश में 41 हजार से अधिक दुकानों ने हड़ताल का समर्थन किया।
हालांकि, मरीजों को राहत देने के लिए कई राज्यों में अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर और 24 घंटे खुलने वाली दवा दुकानें चालू रखी गईं। स्वास्थ्य विभाग और ड्रग कंट्रोल प्रशासन ने जरूरी दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने के निर्देश भी जारी किए।
इस हड़ताल को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर मिलने वाली सस्ती दवाओं और होम डिलीवरी को सुविधाजनक बताया, जबकि मेडिकल स्टोर संचालकों ने इसे छोटे व्यापारियों के लिए खतरा बताया।