कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की सियासत में एक नया अध्याय लिख दिया है। बंगाल के चुनावी इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बहुमत का जादुई आंकड़ा पार कर सत्ता की चाबी अपने हाथ में ले ली है। इस बड़ी जीत के बाद अब गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह गूंज रहा है कि– “बंगाल का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा?”
पार्टी के भीतर और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच तीन प्रमुख नामों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है: शुभेंदु अधिकारी, दिलीप घोष और रूपा गांगुली।
1. शुभेंदु अधिकारी: ‘जायंट किलर’ की मजबूत दावेदारी
शुभेंदु अधिकारी इस समय मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे माने जा रहे हैं। भवानीपुर जैसी हाई-प्रोफाइल सीट पर ममता बनर्जी को मात देकर उन्होंने एक बार फिर खुद को ‘जायंट किलर’ साबित किया है। टीएमसी की अंदरूनी रणनीतियों से वाकिफ होने और राज्यभर में अपनी पकड़ के कारण हाईकमान उन पर भरोसा जता सकता है। विपक्ष के नेता के तौर पर उनका आक्रामक रुख भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उन्हें काफी लोकप्रिय बनाता है।
2. दिलीप घोष: संगठन के जमीनी सिपाही
भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष की दावेदारी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खड़गपुर सदर सीट से बड़ी जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता फिर से साबित की है। दिलीप घोष के कार्यकाल में ही भाजपा ने बंगाल में 2019 और 2021 में अपनी जमीन मजबूत की थी। आरएसएस से जुड़ाव और जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ उनका सीधा संपर्क उन्हें इस पद का प्रबल दावेदार बनाता है।
3. रूपा गांगुली: महिला सशक्तिकरण और ग्लैमर का चेहरा
सोनारपुर दक्षिण सीट से जीत दर्ज करने वाली पूर्व राज्यसभा सांसद रूपा गांगुली भी इस दौड़ में शामिल हैं। मशहूर अभिनेत्री और मुखर नेता के रूप में उनकी पहचान पूरे बंगाल में है। यदि भाजपा किसी महिला चेहरे को आगे कर बंगाल की महिलाओं (महिला वोट बैंक) के बीच एक बड़ा संदेश देना चाहती है, तो रूपा गांगुली एक चौंकाने वाला नाम साबित हो सकती हैं।
पार्टी का ‘चौंकाने वाला’ फैसला?
भाजपा का इतिहास रहा है कि वह कई बार स्थापित नामों के बजाय किसी नए और अप्रत्याशित चेहरे को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंप देती है। चर्चाओं में केंद्रीय मंत्री निशित प्रमाणिक और अग्निमित्रा पॉल के नाम भी शामिल हैं। हालांकि, अंतिम फैसला दिल्ली में होने वाली भाजपा संसदीय बोर्ड की बैठक में लिया जाएगा।
फिलहाल, बंगाल की जनता और भाजपा कार्यकर्ता उत्सुकता से अपने नए ‘दादा’ या ‘दीदी’ के नाम के औपचारिक ऐलान का इंतजार कर रहे हैं।