केंद्रीय वित्त मंत्री Nirmala Sitharaman ने कहा है कि पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती करने से सरकार को करीब 1 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। उन्होंने बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया संकट के बीच ईंधन कीमतों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत बताई।
मुंबई में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार को इस समय “3Fs” यानी Fuel, Fertiliser और Forex पर खास ध्यान देना पड़ रहा है। उनका कहना था कि अंतरराष्ट्रीय हालात का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था, ईंधन कीमतों और व्यापार पर पड़ सकता है।
वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार जनता पर अचानक बोझ नहीं डालना चाहती, लेकिन पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम करने का असर सरकारी खजाने पर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकार को राजस्व और राहत के बीच संतुलन बनाकर चलना पड़ रहा है।
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के कारण तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। इसका असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देशों पर भी पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती करती है तो आम लोगों को राहत मिल सकती है, लेकिन इससे वित्तीय घाटा बढ़ने की आशंका भी रहेगी। दूसरी ओर सरकार फिलहाल महंगाई और आर्थिक स्थिरता दोनों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही है।
वित्त मंत्री ने लोगों से अफवाहों और डर फैलाने वाली बातों से बचने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत है और सरकार हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।