अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio ने भारत-अमेरिका संबंधों को मजबूत बताते हुए कहा है कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के मुताबिक अधिक से अधिक तेल और ऊर्जा संसाधन उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। भारत दौरे से पहले उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को नई दिशा देने पर बातचीत चल रही है और अमेरिका चाहता है कि भारत उसकी ऊर्जा निर्यात नीति का बड़ा साझेदार बने।
रुबियो ने कहा कि अमेरिका में रिकॉर्ड स्तर पर तेल और गैस उत्पादन हो रहा है और वॉशिंगटन चाहता है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए अमेरिकी सप्लाई पर ज्यादा भरोसा करे। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में वेनेजुएला के तेल को लेकर भी भारत के साथ संभावनाएं तलाश की जा सकती हैं।
उन्होंने भारत को “महत्वपूर्ण साझेदार” बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। भारत यात्रा के दौरान क्वाड देशों की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें क्षेत्रीय सुरक्षा और सप्लाई चेन जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
हाल के महीनों में रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिका और भारत के बीच चर्चा तेज रही है। इससे पहले भी रुबियो ने दावा किया था कि भारत ने अतिरिक्त रूसी तेल खरीद को सीमित करने पर सहमति जताई है। हालांकि भारत ने हमेशा यह कहा है कि उसकी ऊर्जा नीति राष्ट्रीय हित और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखकर तय होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका भारत के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना चाहता है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। भारत दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता देशों में शामिल है और वह अपने तेल आयात के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में लगातार काम कर रहा है।